21 दिसंबर 2006 - दीपिका उर्फ पायल के मोबाइल के आईएमईआई रन होने की जानकारी मिली। यही से इस प्रकरण के खुलासे की शुरुआत हुई।
29 दिसंबर 2006- सुबह करीब 9 बजे कोठी डी-5 के पीछे तलाशी शुरू। एक के बाद एक नर कंकाल मिलने से कुछ देर बाद ही मीडिया की सुर्खियां बन गई और इस प्रकरण की परत-दर-परत खुलती गई।
31 दिसबंर 2006- मुख्यमंत्री मायावती ने निठारी का दौरा किया। शासन ने पीडि़तों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की।
2 जनवरी 2007- कपड़ों के आधार पर 17 बच्चों की शिनाख्त।
3 जनवरी 2007- 3 पुलिस अफसर सस्पेंड। 6 सब इंस्पेक्टरों की बर्खास्तगी।
4 जनवरी 2007- नौकर सुरेंद्र कोहली और मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर का नारको टेस्ट कराने के लिए गांधीनगर ले जाया गया।
5 जनवरी 2007- पीडि़त परिजनों की मांग पर राज्य सरकार ने सीबीआई जांच को हरी झंडी दी।
11 जनवरी 2007- सीबीआई ने निठारी कांड की जांच शुरू की और कोठी की तलाशी ली।
13 फरवरी 2009- गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई।
आप क्या जानते हैं निठारी के बारे में..... कितना जानते हैं...... उससे कहीं ज्यादा मिलेगा यहां आपको....एक-एक सच...आंखों देखा सच.... परत-दर-परत....
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मीडिया प्रेशर में मालिक व नौकर को बराबर को आरोपी बनाया गया
निठारी कांड के दौरान प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार हैवानियत, नर पिशाच जैसे शब्दों का प्रयोग मालिक व नौकर के लिए प्रयोग किया जा रह...
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जब 3 दिसंबर 2006 को पंधेर सीओ ऑफिस आया था तो पूछताछ के लिए तत्कालीन सेक्टर-20 थाना प्रभारी बी.पी. सिंह भी मौजूद थे। पंधेर की कॉलगर्ल से संपर...
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यह जानकारी आपको चौंका सकती है। क्योंकि खूनी कोठी की शिकार हुई दीपिका उर्फ पायल खुद एक कॉलगर्ल थी और उसका बाप ही उससे यह धंधा करवाता था। इसके...
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सुबह करीब 9 बज रहे थे। अच्छी खासी ठंड थी। इत्तफाक से उस दिन मैं जल्दी ही घर से बाइक लेकर नोएडा आ गया। शायद कोई प्रेस कॉंफ्रेंस होने वाली थी।...
1 टिप्पणी:
dsd
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