मोनिंदर सिंह पंधेर कई कॉलगल्र्स के संपर्क में था। अब आप जरूर सोच रहे होंगे कि मुझे कैसे पता। तो मैं बता दूं कि मेरे पास पंधेर के मोबाइल फोन नंबर 9810098644 की 1 जुलाई 2006 से 30 दिसंबर 2006 तक की कॉल डिटेल है। इसका मैंने कई दिनों तक लगातार अध्ययन किया। उसमें से मैने कई नंबरों को शार्ट लिस्टेड किया। उन नंबरों पर कॉल किया। इनमें से कई नंबर कॉलगर्ल के निकलें। लेकिन किसी ने अपनी असलियत बताना मुनासिब नहीं समझा। अचानक एक खास नंबर लगातार आउटगोइंग कॉल पर नजर टिकी। मैने कॉल किया। जवाब मिला 'हैलो, हू आर यूÓ। मैने कहा ' एम आकाश, फ्राम क्राइम इंवेस्टिगेशन टीम। आपका नंबर पंधेर की कॉल डिटेल में है। कई बार आपकी बातचीत हुई है। इसकी वजह। कैसे जानती हैं आप उसे।Ó इस तरह सवालों का लंबा-चौड़ा जाल फेंक डाला। ताकी सामने वाले को मेरी असलियत का पता ही न चले। अक्सर खबरों की खबर निकालने के लिए मैं ऐसी हरकत कर लेता हूं। जब कोई आसानी से मीडिया वाले को जवाब नहीं देता था। ऐसा करना मजबूरी भी हो जाती थी।
जवाब मिला ' हां, जानती हूं। मैने पूछा आपका नाम। जवाब दिया कि आप लोग कई बार पूछ चुके हैं। फिर क्यों? आखिर आप कौन हैं। मैं सब कुछ बताऊंगी लेकिन पहले आप सचाई बताएं। मुझे लगा ये औरों से अलग है। अंदाजा सही भी निकला। उसने अपना नाम क्रिस्टी बताया। नार्थ इंडिया की रहने वाली हूं। और आप, अभी तक नहीं बताया आपने।
उसकी ईमानदारी जानकर मैने भी अपनी असलियत उजागर कर दी। बता दिया मीडिया वाला हूं। वह थोड़ा हिचकिचाई। लेकिन थोड़ी देर बाद खुल गई। टूटी फूटी हिंदी बोलती थी। लेकिन सच बोलती थी। क्राइम कवर करता रहा हूं, तो इतना अंदाजा लगा लिया। मैने पूछा कि किस तरह की शख्सियत है पंधेर। सबसे पहले जवाब मिला कि आप लोग 'उनकेÓ बारे में गलत लिखते हैं। नर पिशाच, हैवान.... ऐसे नहीं हैं वो। दिल के बहुत अच्छे हैं। खुशमिजाज इंसान हैं। सभी तरह से खुश रखते हैं। मुझे कई बार सूरजकुंड मेले में घुमाने भी ले जा चुके हैं। उनके साथ टूर पर देहरादून भी जा चुके हैं। मैने उनके साथ काफी हसीन पल गुजारे हैं। हर पल मुझे याद है। जब कभी वह टेंशन में होते थे मुझे याद करते थे। हम भी इसका इंतजार रहता था। कभी ऐसा नहीं लगा कि उनके दिल में प्यार के साथ हैवान भी छिपा है। ऐसा है भी नहीं। इतना करीब से जो देखा है। बच्चों से वह बहुत प्यार करते थे। इसका अहसास भी मुझे है। बच्चों के साथ कभी भी वह इस तरह हैवान नहीं बन सकते। इतना दावे के साथ कह सकती हूं। क्योंकि इतने रुपये हैं उनके पास जब चाहे उसे घर पर बुला सकते थे। इसलिए गरीब बच्चों के साथ हैवान बनना, कभी नहीं हो सकता। सपने में भी नहीं।
मैने पूछा कि कोठी में कितनी बार गई और क्या महसूस किया? जवाब मिला, कई बार गई। अक्सर जाती रहती थी। जब कभी वह बुलाते थे। कोठी में थोड़ा अजीब लगता था। लेकिन उनके होने पर महसूस नहीं होता था। लेकिन नौकर बहुत अजीबोगरीब नजरों से देखता था। उससे डर जरूर लगता था। उसकी हरकतें भी अजीब थी। इसलिए वह शराब और खाने का सामान पहुंचाकर चला जाता था। फिर वह पंधेर पर आ जाती है। कहती है लेकिन वह दिल के बड़े अच्छे थे। अपनी इच्छाओं को जताते थे। उसने यहां तक बताया था कि मैं कोर्ट में भी जाऊंगी और पूरी बात बताऊंगी। सीबीआई के कहने पर वह गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में गई थी। मशहूर फिल्म देवदास का डायलॉग है कि 'तवायफ के पास भी दिल होता हैÓ। इससे पता चला कि माधुरी दीक्षित की रील लाइफ की तरह क्रिस्टी की रीयल लाइफ में पंधेर के रूप में एक देवदास था। जो शराब पीकर तो नहीं, जेल में अब आखिर की जिंदगी गुजार रहा है।
आप क्या जानते हैं निठारी के बारे में..... कितना जानते हैं...... उससे कहीं ज्यादा मिलेगा यहां आपको....एक-एक सच...आंखों देखा सच.... परत-दर-परत....
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