10 जनवरी 2010

27 नवंबर 2006 कॉल डिटेल से खुला खूनी कोठी का राज़

अगर दीपिका उर्फ पायल गायब नहीं हुई होती तो शायद ही लापता हो रहे मासूम बच्चों का रहस्य सुलझ पाता। पायल के मोबाइल फोन में नवंबर में यूज किए हुए सिमकार्ड की जांच की गई। उसमें पता चला कि 1 से 27 नवंबर के बीच पायल के मोबाइल फोन में 9871215328 नंबर का यूज किया गया। इसे सेक्टर-31 निठारी निवासी सुरेंद्र कोली के नाम पर खरीदा गया है। घनी आबादी से घरे निठारी में इस नाम के युवक का पता लगाना आसान नहीं था। हुआ भी यही, पुलिस पता नहीं लगा पाई। तभी कॉल डिटेल में 27 नवंबर 2006 की सुबह 11:07 बजे से लेकर दोपहर 1:13 बजे के बीच 01202453372 नंबर से 11 बार हुई बातचीत पर पुलिस की नजर टिकी। इस नंबर को देख एसआई विनोद पांडे चौंक गए। उन्होंने उस नंबर पर कॉल किया। शायद, पंधेर के ड्राइवर ने फोन रिसीव किया। सब इंस्पेक्टर को पता था कि कोई भी आसानी से कुछ नहीं बताएगा। इसलिए पुलिसिया शैली में पूछा कि, साले सुरेंद्र कोली बहुत शातिर समझता है। और भी गालियां.....। पुलिस वाली। यह सुनकर ड्राइवर सहम गया। उसने कहा कि सुरेंद्र तो गांव अल्मोड़ा गया है। उससे घर का पता पूछा गया। उसने बता दिया सेक्टर-31 डी-5।
इस तरह पुलिस को डी-5 कोठी के खिलाफ पायल को गायब कराने के पीछे पुख्ता सबूत मिल गए। यह बात है 24 दिसंबर 2006 की। पुलिस की एक टीम कुछ घंटे बाद ही कोठी पहुंची। वहां मोनिंदर सिंह पंधेर से मुलाकात हुई। पंधेर से पूछा गया कि कोली कहां है। वहीं, जवाब मिला कि वह गांव गया है। इसके बाद पंधेर को पायल के मोबाइल फोन और उसमें यूज किए हुए सिमकार्ड की जानकारी दी गई। यह जानकर पंधेर भी दंग रह गया। अब पुलिस ने नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार करवाने की जिम्मेदारी पंधेर के कंधों पर डाल दिया। पंधेर भी तैयार हो गया।

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